Tuesday, February 6, 2018 7:03 AM

Kele Baje Muruli...Gopal Babu Swami ...kumaoni song


एक युवती जिसका पति युद्ध-भूमि में गया हुआ और उसका कई दिनों से कोई समाचार नहीं आया है जब वह पर्वतों की ऊंची चोटियों से आती हुई बांसुरी की धुन को सुनती है तो वह बैचेन हो जाती है। वह अपनी सहेली से कहती है कि यह ऊंची-ऊंची चोटियों में बंशी कौन बजा रहा है। इस धुन को सुन कर मेर विरह-दग्ध हृदय मानो फट सा जाता है। इसे सुन कर दिल में एक टीस सी उठती है कौन है ये पापी जिसने मेरा मन दुखा दिया है। मेरे पति युद्ध-क्षेत्र में हैं और यह बंशी बजा रहा है। मेरे मायके की देवी भगवती तू मेरी आवाज़ सुन लेना और शीघ्र ही मेरे पति की कुशलता का समाचार मुझ तक पहुंचाना। मैं तेरे द्वारे आके खूब बड़ी पूजा करवाऊंगी। भूमि की रक्षा करने वाले भुमिया देव मेरी आवाज सुन लो और मेरी लाज रख लो। मेरे गले का मंगलसूत्र अब तुम्हारे ही हाथ में हैं। तुम युद्ध क्षेत्र में मेरे पति के साथ ही रहना और उनकी रक्षा करना ..हाँ।



कैले बजै मुरुली…. बैंणा ऊंची ऊंची डान्यूँ मा
कैले बजै मुरुली… बैंणा ऊंची ऊंची डान्यूँ मा
चिरी है कलेजी मेरी तू देख मन मा
कैले बजै मुरुली.. हो बैंणा ऊंची ऊंची डान्यूँ मा

मुरुली क सोर सुणी हिया भरी ऐगो,
को पापी ल मेरो बैणा मन दुखै हैछो
स्वामी परदेसा मेरा उ जरीं लाम मा
कैले बजै मुरुली…बैंणा ऊंची ऊंची डान्यूँ मा

मेर मैत की भगवती तू दैणी हजैये,
मेर मैत की भगवती तू दैणी हजैये
कुशल मंगल म्यारा स्वामी घर लैये,
कुशल मंगल म्यारा स्वामी घर लैये


नंगरा निसाड़ा ल्यूँलो देबी मैं तेरा थान मा,
नंगरा निसाड़ा ल्यूँलो देबी मैं तेरा थान मा
कैले बजै मुरुली हो बैंणा ऊंची ऊंची डान्यूँ मा


Sunday, January 21, 2018 7:34 AM

Phulari by Padavaas Lyrics | Garhwali song lyrics |


चला फुलारी फूलों को
सौदा-सौदा फूल बिरौला
हे जी सार्यूं मा फूलीगे ह्वोलि फ्योंली लयड़ी
मैं घौर छोड्यावा
हे जी घर बौण बौड़ीगे ह्वोलु बालो बसंत
मैं घौर छोड्यावा
हे जी सार्यूं मा फूलीगे ह्वोलि
चला फुलारी फूलों को
सौदा-सौदा फूल बिरौला
भौंरों का जूठा फूल ना तोड्यां
म्वारर्यूं का जूठा फूल ना लायाँ
ना उनु धरम्यालु आगास
ना उनि मयालू यखै धरती
अजाण औंखा छिन पैंडा
मनखी अणमील चौतर्फी
छि भै ये निरभै परदेस मा तुम रौणा त रा
मैं घौर छोड्यावा
हे जी सार्यूं मा फूलीगे ह्वोलि
फुल फुलदेई दाल चौंल दे
घोघा देवा फ्योंल्या फूल
घोघा फूलदेई की डोली सजली
गुड़ परसाद दै दूध भत्यूल
अयूं होलू फुलार हमारा सैंत्यां आर चोलों मा
होला चैती पसरू मांगना औजी खोला खोलो मा
ढक्यां मोर द्वार देखिकी फुलारी खौल्यां होला

Hindi Translation :
चलो ‘फुलारियो’! (फूल डालने वाले बच्चे) फूलों के लिए
ताज़े ताज़े फूल चुन लें
हे जी ! खेतों में खिल गयी होंगी ‘फ्योलि’ की लड़ियाँ
मुझे घर छोड़ आओ
हे जी ! घर और वन में लौट आया होगा सुकुमार बसन्त
मुझे घर छोड़ आओ
चलो ‘फुलारियो’! (फूल डालने वाले बच्चे) फूलों के लिए
ताज़े ताज़े फूल चुन लें
भँवरों के झूठे फूल ना तोड़ना
मधु-मक्खियों के झूठे फूल ना लाना
ना वैसा निर्मल यहाँ का आकाश, ना स्नेहिल यहाँ की धरती
अनजान लोग हैं, विपरीत
मनुष्य अनमेल हैं चारों ओर
छी ! अभागे परदेस में तुम्हें रहना है, रहो
मुझे घर छोड़ आओ
फुल फुल देवी! दाल चावल दे
घोघा देवता, फ्युली के फूल
घोघा फुलदेयी की डोली सजेगी
गुड़ का प्रसाद, दही, दूध-भात का नैवेद्य
खिले होंगे फूल हमारे उगाये हुवे आड़ू (peach), ख़ुबानी (apricot) पर
होंगे चैत (महीने) का शगुन माँग रहे, औजी (drummers) आँगन आँगन में
ढके हुवे दरवाजे (मोरी) देख कर ‘फुलारि’ (फूल डालने वाले बच्चे), ठगे रह गये होंगे

English Translation :
Let’s go ! ‘Phulari’ for flowers
will pick fresh flowers
O dear ! In the fields must have blossomed’Phyoli’ buds
Take me home
O dear ! Home & woods have rebounded with primness spring
Please take me home
O dear ! In the fields must have blossomed
Let’s go ! ‘Phulari’ for flowers
will pick fresh flowers
Don’t pluck flowers tasted by bumblebees
Don’t bring flowers tasted by honeybees
Sky here isn’t serene alike not the land Loving either
Unknown people, unlike Odd people all around
Fie ! you in this unlucky place
Fie ! in this unlucky place
live here if you want
take me home
O dear ! In the fields
must have blossomed
O Phuldeyi ! Give lentils and rice
O Lord Ghogha ! give flowers of ‘Phyoli’
will adorn the palanquin of Ghogha & Phuldeyi
offerings of jaggery, curd, oblation of milk & Rice
Flowers must have blossom on peach, apricot we planted
‘Aujis’ in the courtyards, must be asking for the new year’s favours
seeing locked doors Phulari would have stunned…

Shakuna De Lyrics | Garhwali | Kumaoni | Song Lyrics by Pandavaas



शकुना दे एक संस्कार गीत हैं ।

संस्कार गीतों में प्रमुख हैं शकुनाखर। इन गीतों को प्रत्येक शुभ कार्य जैसे – विवाह, जन्मोत्सवों, जनेउ तथा अन्य प्रकार के सभी शुभ कार्यों से पहले गाया जाता है। शकुनाखर का तात्पर्य होता है ‘शगुन के अक्षर’। इन्हें गाने वाली ज्यादातर महिलायें ही होती हैं। इन शकुनाखरों में से कुछ इस प्रकार हैं

झन दीया बोज्यू छाना बिलौरी
लागला बिलौरी का घामा
हाथे कि कुटली हाथे में रौली
नाके की नथुली नाके में रौली
लागला बिलौरी का घामा
दुख सुख कती नी होनू च्येली
वाले रुनी ठुल नाना
सास सौर घरा, मै बाब जसा
करला ऊ त्यारा फामा
छाना बिलौरी जाणों छौ च्येली
छाना बिलौरी जाणा
न्हे ज्यूला बोज्यू छाना बिलौरी
लागला बिलौरी का घामा
आसीस देयां भिटणे रैय्यां
लागला बिलौरी का घामा
हम जानू बौज्यू हमर, ससुर का देस
चौ गंगा का पार जानू, स्वामी का मुलुक
बौज्यू की नगरी छूटी, ईजा को आंचलो
भै भैनो को साथ छूटो, सखियों का साथ
शकुन दे, शकुन दे, शकुन ए काज
जब तक रौली च्येली, गंगा ज्यू की धार
सूरजे की ज्योत रौली, धरती आगास
जब तक औने रौला, जेठ, आसाढ़, फाग,
तब तक रौलो त्यार अमर सुहाग।

Lyrics (English meaning) :
Dear Papa, don’t marry me off to Chhana Billauri (in-law’s house)
will cast Billauri’s incense (Sunshine)
Hoe of hand will remain as it is
Nose ring will remain as it is
will cast Billauri’s incense.
Where aren’t the sorrows and happiness, O my Daughter !
There will be younger and elders too
in-law’s house will be as it is parent’s house
they will look after you
You have to go Chhana Billauri. Daughter !
Chhana Billauri you have to go.
I will go Chhana Billauri, Papa!
will cast Billauri’s incense.
Give blessings keep greeting,
will cast Billauri’s incense.
I am going father, to the country of in-laws
Crossing over several rivers, to the country of my spouse.
Your world, father, is going to be left behind,
and mother’s love
Company of my brothers, sisters and friends
all will be left behind,
Give Blessings, Give Blessings, Bless the Marriage
Till there is water in river Ganges, O Daughter !
As long persists, Sun’s glare, land and sky,
as long will fall Summer, Winters and Springs
May your spouse live and you remain happy,
Until then i bless you so…
Give Blessings, Give Blessings, Bless the Marriage

Lyrics (Hindi Meaning) :
मत देना पापा छाना बिलौरी
लगेगी बिलौरी की धूप
हाथ की कुटली हाथ में ही रह जाएगी
नाक की नथुली नाक में ही रह जाएगी
लगेगी बिलौरी की धूप
दुख सुख कहां नहीं होते बेटी
वहां भी छोटे बड़े होंगे
सास ससुर का घर माँ बाप जैसा ही तो होगा।
वो तेरी देख रेख करेंगे
छाना बिलौरी जाना है बेटी
छाना बिलौरी जाना है
में जाउंगी पापा, छाना बिलौरी
आशीर्वाद देना मिलते रहना
हम जाते हैं पापा, ससुर के देश
कई नदियों के पार जाते हैं स्वामी के देश
पापा की नगरी छूटी, माँ का आँचल
भाई बहनों का साथ छूटा, सखियों का साथ
शगुन दे, शगुन दे, कार्य को शगुन दे
जब तक रहेगी बेटी, गंगा जी की धार
सूरज की जोत रहेगी, धरती आकाश
जब तक आते रहेंगे, जेठ, आसाढ़, फागुन,
तब तक रहेगा तेरा अमर सुहाग।

Saturday, October 28, 2017 7:03 AM

Chait ki chaitwali song lyrics





छोरी ........
उड़नेडू एग्याय रे चैता की चैत्वल्या
चैता की चैत्वाल्या
चैता की चैत्वाल्या हा हा
शिव जी का बागवान सची फूल फुल्या छन ..
अरे फूल फूल्या छन ..
हा फूल फूल्या छ ना ना
 *************garhwali song lyrics *************************
हाथयो मा धरयु चा तेरु  रेशमी रूमाला
सचे मुंड मा धरयु च तेरु घासी को घडुआ .
बल हाथयो मा धरयु चा तेरु  रेशमी रूमाला
सचे मुंड मा धरयु च तेरु घासी को घडुआ .
बल रेशमी रुमालना भवरा हका ले ..
पोथला उड़े ले ...पोथला उड़े ल्या हा हा
बल रेशमी रुमालना भवरा हका ले ..
पोथला उड़े ले ...पोथला उड़े ल्या हां हां ...

 *************garhwali song lyrics ************************* 
खुट्यु की झवरी तेरी छुम छुम बजली
तु ता ठुम ठुम हिटेली
बल  खुट्यु की झवरी तेरी छुम छुम बजाली
तुता ठुम ठुम हिटेली
तुतो बिग्रेली घुट्यो न
सचे कनु खेल लगेली
अरे पिफले डाली मुड़ी तू चौफली खेलली
चोपत्ति खेल ली .
चोपत्ति खेल ली ..ल्या हां हां
बल पिफले डाली मुड़ी तू चौफली खेलली
चोपत्ति खेल ली
चोपत्ति खेली ..ल्या हां हां

 *************garhwali song lyrics *************************
तड़तड़ी नाकुड़ी तेरी  सुडसुडी नाकुड़ी तेरी  
संगुली सी बुलाक तेरी . ,
तड़तड़ी नुकड़ीनदा छोरी , भली बीराजी दीन्दा
सची भुराणी लटुली
अरे भूराणी लटुली तेरी डांडाती फुरमा ..
छोरी फुर फुरा उडाली
मन मा खित खिता हैसदी ..
तू का देखा देके जाना
भुराणी लटुली व् फुरर फुरा उड़े ले
फुर फुरा उड़ेले फुर फुरा उड़े ल्या हा हा ..
बल घुन्ग्रयाली लटुली व् फर फुरा उड़े ले ..
फुर फुरा उड़ेले फुर फुरा उड़े ल्या हा हा ..

 *************garhwali song lyrics *************************
सुवापंखी साडी तेरी मखमली अंगिया तेरी पिंगली चादरी
सुवापंखी साडी तेरी मखमली अंगिया तेरी पिंगली चादरी
सचे रासुल्या का बीच , छोरी डांडा की कुले मा
पिंगली चादरी व् फुर फुरा उड़ेले
फुर फुरा उड़ेले
फुर फुरा उड़े ल्या हां हां ..
बल भला भला फूलो की चोंसरी बणे ले
फूलमाला गड़े ले ..चोंसरी बाणे ल्या हां हां
पैल्या की फूलमाला तू बद्री चढे ले ..
बल दूसरी फूलमाला तू केदार चढे ले .
बल पैल्या की फूलमाला तू बद्री चढे ले ..
बल दूसरी फूलमाला तू केदार चढे ले .

 *************garhwali song lyrics *************************
बल तीसरी फूलमाला हरिद्वार चढे ले ..
हरिद्वार चढे ले
हरिद्वार चढे ल्या   हां हां ...’
बल तीसरी फूलमाला हरिद्वार चढे ले ले ..
हरिद्वार चढे ले ले ..
हरिद्वार नहे ल्या   हां हां ...




  

Sunday, September 10, 2017 9:03 PM

Ikhi prithvi ma ikhi janam ma



नरेन्द्र सिंह नेगी जी द्वारा गाये बहुत से गाने ऐसे है जिनमें उपमायें, भाव पूरी तरह से नये तरीके हैं। कुछ गाने आप पहले भी सुन चुके हैं जैसे रोग पुराणु कटे ज़िन्दगी नई ह्वैगे, तेरु मुल – मुल हैंसुणु दवाई ह्वैगे या फिर त्यारा रूप कि झौल मां, नौंणी सी ज्यू म्यारु । आज प्रस्तुत है इसी तरह का एक और गाना। इसका भावार्थ करना कफी कठिन है। इसलिये हम इसके भावार्थ के साथ साथ इसका पद्यानुवाद भी दे रहे हैं। इस गाने में प्रेमी एक सुन्दरी को देख कर यह समझ नहीं पा रहा है कि उसने उसने सुन्दरी को कहाँ देखा है, स्वपन में या फिर यह मात्र उसका भ्रम है। उस सुन्दरी को देख उसके मन में जिस तरह के भाव आते हैं उन्ही को नये तरीके के उपमानों द्वारा व्यक्त किया गया है।
भावार्थ : इस ही पृथ्वी में, इस ही जनम में कहीं तो देखा है उस सुन्दरी को, वह सुन्दरी जो अब मन में बस चुकी है। मेरी यह समझ में नहीं आ रहा है कि उसे किसी सपने में देखा था या फिर यह कोई भ्रम है।
वह पराये की क्यारी से चोरी की गई ककड़ी जैसी है, उधार में मिली पकोड़ी जैसी स्वादिष्ट है वो। कांटों के बीच छुपे हिसालू फल के गुच्छे सी, पिंडालू (अरबी) के पत्ते पर चमकती पानी की बूंद सी, उसे मैने अखिर देखा कहाँ, किसी सपने में देखा था या फिर यह कोई भ्रम है।
किसी देवाने बुढ़े द्वारा देखे गये शादी के दिवा स्वप्न जैसी, गरमी की धूप में किसी झरने के शीतल जल की तरह है वो। काले बादलों के बीच चमकती चांदनी की तरह, दाता के मुंह को ताकते किसी भिखारी की नजर की तरह, उसे मैने अखिर देखा कहाँ, किसी सपने में देखा था या फिर यह कोई भ्रम है।
सरदियों के दिनों में गुनगुनी धूप जैसी है वो, किसी बच्चे मन में दूध-भात के लिये उठती आतुरता जैसी है वो। मिर्च से भरे खाने बाद मिली खीर जैसी मीठी, परदेश में मिलने वाली घर की चिट्ठी जैसी, उसे मैने अखिर देखा कहाँ, किसी सपने में देखा था या फिर यह कोई भ्रम है।
शादी बारात में सालियों द्वारा दी गयी गाली जैसी, नाती पोतों को मिलने वाली दादी की ’झप्पी’ जैसी है वो। भूखे के आगे भोजन से भरी थाली जैसी, आंगन के कोने पर आती नारंगी की डाली जैसी, उसे मैने अखिर देखा कहाँ, किसी सपने में देखा था या फिर यह कोई भ्रम है।
सोने जैसे सुन्दर गले में मोतियों की माला जैसी सुन्दर, पानी भरे बर्तन में चांद की परछाई जैसी सुन्दर, घनी अंधेरी रात में मशाल के प्रकाश जैसी, अंधेरे मन में आशा के उजाले जैसी, उसे मैने अखिर देखा कहाँ, किसी सपने में देखा था या फिर यह कोई भ्रम है।
गीत के बोल देवनागिरी में
इखि ई पिरथिमा ये हि जलम मां, इखि ई पिरथिमा ये हि जलम मां
देखि त छैं च कख देखि होलि,
रुपसि बांद ज्वा बसिगे मन मां, रुपसि बांद ज्वा बसिगे मन मां
देखि त छैं च कख देखि होलि- कख देखि होलि ..
सुपिन्यु ह्वै होलू, कि बैम रै होलू ? सुपिन्यु ह्वै होलू, कि बैम रै होलू ?
इखि ई पिरथिमा ये हि जलम मां, देखि त छैं च कख देखि होलि
रुपसि बांद ज्वा बसिगे मन मां,
देखि त छैं च कख देखि होलि – कख देखि होलि ..
सुपिन्यु ह्वै होलू, कि बैम रै होलू ?
सुपिन्यु ह्वै होलू, कि बैम रै होलू ?
चोरी काखड़ि, बिरानि सगोड़ीकि सी – छै वा , चोरी काखड़ि, बिरानि सगोड़ीकि सी – छै वा
सवादि येनि कि पैणेकि पकोड़ि सी – छै वा
काड़ों का बोटूमा हिंसारे गुन्दसि, पिंडाळू पातुमा उंसिकी बुन्दसि – कख देखि होलि
सुपिन्यु ह्वै होलू, कि बैम रै होलू ? सुपिन्यु ह्वै होलू, कि बैम रै होलू ?
दाना दिवाना कि ब्योवाकि गांणि सी – छै वा , दाना दिवाना कि ब्योवाकि गांणि सी – छै वा
रुड़्यूं का घामूमा छोय्याको पांणि सी छै वा
बादळु बीचमा जूनी झलक्क सी, दाता का मुक्क मा मंगत्याकि टक्क सी – कख देखि होलि
सुपिन्यु ह्वै होलू, कि बैम रै होलू ? सुपिन्यु ह्वै होलू , कि बैम रै होलू ?
ह्यूंदि का दिनूमां घामै निवात्ति सी – छै वा , ह्यूंदि का दिनूमां घामै निवात्ति सी – छै वा
बाला का मनैकि स्यांणि दुद भात्ति सी – छै वा
मरच्यांणा खाणामा खीर जन मिट्ठि सी , दूर परदेस मा घोरैकि चिट्ठी सी – कख देखि होलि
सुपिन्यु ह्वै होलू, कि बैम रै होलू ? सुपिन्यु ह्वै होलू, कि बैम रै होलू ?
ब्यो बर्यात्युं मां स्याळि सी गाळि सी – छै वा , ब्यो बर्यात्युं मां स्याळि सी गाळि सी – छै वा
नाति नत्येणों पर दादी अंग्वालि सी – छै वा
भूखा का अगाड़ी भोजने थालि सी, चौका तिराळि नारंगि डालि सी – कख देखि होलि
सुपिन्यु ह्वै होलू, कि बैम रै होलू ? सुपिन्यु ह्वै होलू, कि बैम रै होलू ?
सूनैकि गौलिमा मोत्युंकि माला सी – छै वा , सूनैकि गौलिमा मोत्युंकि माला सी – छै वा
पांणिकि तौलिमा जूनि सौंडल्या सी – छै वा
औंसिकि घनाघोर राति मुछ्यालि सी – अंधेरा मन मां आसै उज्यालि सी – कख देखि होलि
सुपिन्यु ह्वै होलू, कि बैम रै होलू ? सुपिन्यु ह्वै होलू, कि बैम रै होलू ?
इखि ई पिरथिमा ये हि जलम मां, देखि त छैं च कख देखि होलि
रुपसि बांद ज्वा बसिगे मन मां, देखि त छैं च कख देखि होलि – कख देखि होलि ..
सुपिन्यु ह्वै होलू, कि बैम रै होलू ? सुपिन्यु ह्वै होलू, कि बैम रै होलू ?
सुपिन्यु ह्वै होलू, कि बैम रै होलू ? सुपिन्यु ह्वै होलू, कि बैम रै होलू ?
गीत का पद्यानुवाद
इसी धरती पर इसी जनम में, देखा तो है पर देखा कहाँ
रूपसी जो बसी है मन में, देखा तो है पर देखा कहाँ, देखा कहाँ
स्वप्न है ये, या है ये वहम….
पराये के घर से चोरी ककड़ी सी है वो, भूखे को दान में मिली पकौड़ी सी है वो,
काटे भरे पेड़ में हिसालू की फून्द, पिंडालू के पात में ओस की बूँद
स्वप्न है ये, या है ये वहम….
दीवाने बूढ़े  के शादी के सपने सी है वो, गरमी की धूप में ठंडे पानी सी है वो,
काले बादल में चांदनी की झलक, दाता को तकते भिखारी की ललक
स्वप्न है ये, या है ये वहम….
सरदी के महीने की गुनगुनी धूप सी है वो, दूध की बच्चे को लगी भूख सी है वो,
मिर्च खाने के बाद मिली खीर जैसी, परदेश में राँझा को मिली हीर जैसी
स्वप्न है ये, या है ये वहम….
शादी में साली की प्यारी गाली सी है वो, दादी की गोद में मिली खुशहाली सी है वो,
भूखे के आगे ज्यों भोजन की थाली,  आँगन की कोने में नाँरगी की डाली
स्वप्न है ये, या है ये वहम….
सोने से गले में मोती की माला सी है वो, पानी के बर्तन में चांद की छ्टा सी है वो,
घने अंधकार में जलती मशाल सी, अंधेरे मन में आस के उजाले सी
स्वप्न है ये, या है ये वहम…
इसी धरती पर इसी जनम में, देखा तो है पर देखा कहाँ
रूपसी जो बसी है मन में, देखा तो है पर देखा कहाँ, देखा कहाँ
स्वप्न है ये, या है ये वहम…..

Ghuguti ghuron lagi



उत्तराखण्ड का लोकसंगीत न्यौली और खुदैड़ जैसे विरह गीतों से भरा पड़ा है। इन गीतों का अधिकांश भाग विवाहित महिलाओं पर आधारित है जो विकट ससुराल के कष्टपूर्ण जीवन को कोसते हुए मायके के दिन याद करती हैं। पहाड़ के गांवों में महिलाओं का जीवन अत्यंत संघर्षशील और कष्टप्रद है। दिनभर खेत-खलिहान-जंगल, मवेशियों और घर-परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर संभालने वाली मेहनतकश, मजबूत नारी को सामान्यत: इतना अवकाश भी नहीं मिल पाता कि वह अपने मायके को याद कर पाये। लेकिन जैसे ही चैत (चैत्र) का महीना लगता है एक जंगली पक्षी "घुघूती" की उदासी भरी आवाज सुनकर महिलाओं को बरबस अपने मायके की याद आ जाती है। ससुराल में रहते हुए वह अनुमान लगाती है कि इस समय उसके मायके के कैसे हाल-चाल होंगे।
यह एक बहुत पुराना लोकगीत है जिसे काफी पहले नरेन्द्र सिंह नेगी जी अपनी एक ओडियो कैसेट में गाया था। यहाँ हम उस पुराने ऑडियो को और नये वीडियो वाले गीत दोनों को प्रस्तुत कर रहे हैं। इसका वीडियो नेगी जी के "चलि भै मोटर चली" वीडियो एलबम में मीना राणा की आवाज में गाये गये गाने को लेकर फिल्माया गया है।
भावार्थ - फिर से चैत का महीना लौट आया है और मेरे मायके की घुघुती अपनी उदासी भरी आवाज में "घुंराणे" (आवाज करने) लगी है। मेरे मायके के सामने दिखने वाले पहाड़ों की बर्फ अब शायद पिघलने लगी होगी और जंगल पुन: पल्लवित होने लगे होंगे। नवजात पक्षी अब अपने घोंसलों से निकलकर उड़ने लगे होंगे, जंगलों में सुन्दर लाल बुरांश के फूल खिलने लगे होंगे। फूल और पत्तियां लेकर गांव के बच्चे सभी घरों की देहरियों पर जाकर पूजन कर रहे होंगे। [फूलदेई पर्व में देहरियाँ पूजी जाती हैं] और मेरे सौभाग्यशाली सहेलियां मिलकर उत्साह और उमंग से भरे थड़्या और चौंफुला नृत्यों  में मग्न होंगी। मेरे मायके वाले घर की चौखट पर बैठे मेरे पिताजी उदास बैठे होंगे और मेरी बीमार माँ मेरी राह देखती होगी। मेरे मायके की तरफ़ से आने वाला कोई आदमी मेरे भाई-बहनों की राजी-खुशी की खबर ले आता तो कुछ तसल्ली मिलती।
गीत के बोल देवनागिरी में
[ मीना राणा द्वारा गाये गीत में कुछ शब्दों का उच्चारण भिन्न है जैसे उसमें ‘म्यारा’ की जगह ‘मेरा’, ‘बौण’ की जगह ‘बण’ व ‘ह्वाला’ की जगह ‘होला’ गाया गया है।]
घुघूती घुरूंण लगी म्यारा मैत की, बौड़ी-बौड़ी ऐगै ऋतु,ऋतु चैत की
घुघूती घुरूंण लगी म्यारा मैत की, बौड़ी-बौड़ी ऐगै ऋतु,ऋतु चैत की, ऋतु,ऋतु चैत की
डांणी कांठ्यूं को ह्यूं, गौली गै होलो, म्यारा मैता को बौण, मौली गै होलो
डांणी कांठ्यूं को ह्यूं, गौली गै होलो, म्यारा मैता को बौण, मौली गै होलो
चाकुला घोलू छोड़ि उड़णा ह्वाला, चाकुला घोलू छोड़ी उड़णा ह्वाला
बैठुला मेतुड़ा कु, पैटणा ह्वाला
घुघूती घुरूंण लगी हो… .
घुघूती घुरूंण लगी म्यारा मैत की बौड़ी-बौड़ी ऐगै ऋतु,ऋतु चैत की, ऋतु, ऋतु चैत की
डाण्यूं खिलणा होला बुरसी का फूल, पाख्यूं हैंसणी होली फ्योली मुल-मुल
डाण्यूं खिलणा होला बुरसी का फूल, पाख्यूं हैंसणी होली फ्योली मुल-मुल
कुलारी फुल-पाति लैकि दैल्यूं- दैल्यूं जाला, कुलारी फुल-पाति लेकी, दैल्यूं- दैल्यूं जाला
दगड़्या भग्यान थड़या-चौंफला लगाला
घुघूती घुरूंण लगी हो…
घुघूती घुरूंण लगी म्यारा मैत की बौड़ी-बौड़ी ऐगै ऋतु,ऋतु चैत की, ऋतु, ऋतु चैत की
तिबरि मां बैठ्या ह्वाला बाबाजी उदास, बाटु हैनी होली मांजी लागी होली सास
तिबरि मां बैठ्या ह्वाला बाबाजी उदास, बाटु हैनी होली मांजी लागी होली सास
कब म्यारा मैती औजी दिसा भैटि आला, कब म्यारा मैती औजी, दिसा भैटि आला
कब म्यारा भै-बैंणों की राजि-खुशि ल्याला
घुघूती घुरूंण लगी हो…
घुघूती घुरूंण लगी म्यारा मैत की बौड़ी-बौड़ी ऐगै ऋतु ,ऋतु चैत की, ऋतु, ऋतु चैत की
ऋतु, ऋतु चैत की, ऋतु, ऋतु चैत की ऋतु, ऋतु चैत की ऋतु, ऋतु चैत की...
Note:- चैत महीना व भिटौली अल्मोड़ा में लोग अपनी कुंवारी कन्याओं को भी भिटोली देते हैं जिसमें वे लोग पूरी, सै (चावल का व्यंजन), मिठाई, कपडे और रुपये आदि अपनी लड़कियों को देते हैं तथा मोहल्ले की लड़कियों को पूरी, सै ,मिठाई और रुपये देते हैं.इस प्रकार यह भिटोली पूरे मोहल्ले में बांटी जाती है, लेकिन जिन घरों में लड़कियाँ नहीं होती हैं,वहाँ रुपये को छोड़ कर केवल पकवान दिए जाते हैं.

Tuesday, August 22, 2017 11:36 PM

हाय तेरी रुमाला



हाय तेरी रुमाल ,है तेरी रुमाल
गुलाबी मुखड़ी।
के भली छजी रे नाक की नथुली।
अहा के भली छजी रे नाक की नथुली।

हाय तेरी रुमाल ,है तेरी रुमाल
गुलाबी मुखड़ी।
के भली छजी रे नाक की नथुली।
अहा के भली छजी रे नाक की नथुली।

{हाय तेरी रुमाल ,हाय तेरी रुमाल
गुलाबी मुखड़ी।
के भली छजी रे नाक की नथुली।
अहा के भली छजी रे नाक की नथुली।
}

गले गलोबन्द हाथो की धगुली
गले गलोबन्द हाथो की धगुली
चम् चम् चमकी रे फरा  की बिंदुली।
चम् चम् चमकी रे फरा  की बिंदुली।

हाय तेरी रुमाल ,है तेरी रुमाल
गुलाबी मुखड़ी।
के भली छजी रे नाक की नथुली।
अहा के भली छजी रे नाक की नथुली।




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