तेरी खुद तेरु ख्याल ..तेरु सम्लोणया रुमाल ..
तेरी खुद तेरु ख्याल ..तेरु सम्लोणया रुमाल ..
सेरी जिंदगी भरो क्मायु इच माल ताल ..मेरु इच माल ताल ... तेरी खुद तेरु ख्याल ..तेरु सम्लोणया रुमाल ......
तेरी माया तू ही जान ..
तेरी माया तू ही जान ..
मेरी माया घानाघोर घनाघोर च ...
हो घनघोर च ..
कब द्यखुलू ..भ्यटूलू ...
कब द्यखुलू ..भ्यटूलू ...
बस इक च रटन यकि सोर च ..
हा ..एक ही सोर च ...
दिन बीती रात बीती ..
दिन बीती रात बीतया महीना साल ..तेरी खुद
तेरी खुद तेरु ख्याल ..
तेरा सम्लोन्या रुमाल .... तेरी खुद तेरु ख्याल ..
'क्या दिन क्या रात' नेगी जी का वो गीत है जिसे जितने बार सुनो उतने बार दोबारा सुनने का मन करता है । दिन हो या रात , मूड अच्छा हो या खराब ..ये गीत हर समय दिल को भाता है । आये पढ़े इस गीत के लिरिक्स...
क्या दिन , क्या रात हो जी हो , क्या दिन , क्या रात हे जी हो .. कैली नि बींगी कैली नि जानी , मेरा मन की बात , है जी हो ,... क्या दिन , क्या रात है जी हो ...
क्या दिन , क्या रात हे जी हो । झुरी झुरी पिंगली ह्वेगे , हरी भरी गात , हा जी हो ,
उन ता मर्ज़ी छ तेरी , सम्हाल ले की भूल जा , तोड़ी करार जानू छे , “गेल पैर कबूल जा ” बांजा कु बगोट है जी हो , बांजा कु बगोट जान याली पछियन भी याली तेरी नज़र कु खोट , है जी हो ..
फूलूं माँ देख एगनी , भोंरा ले बरस गी , तेरी मायालु माया कु , "ज़िकुदी तरस गी " बांजा कु बगोट है जी हो , बांजा कु बगोट , बाला मन की साँची माया माँ , तिल क्या पायी खोट , है जी हो
एंसू बस्ग्यल फिर कुयेदी लौंखाली , आणखी रोली डंड डंड , "ज़िकुदी याखुली डोरली " लांबी ह्युंदै रात , है जी हो , लम्बी ह्युंदै रात , घुटे घुटे की पट मोरी जोलु छोड़ नि दियां साथ , है जी हो
क्या दिन , क्या रात है जी हो , क्या दिन , क्या रात ....है जी हो मेरा ही समदी बैठ जा , कुछ न बोल काखी न जा , माया खोला , माया लोला , "मायादार छुई लगा " लांबी हुँदै रात , हा जी हो , लांबी हुँदै रात ,... माटा मा मिल जाली या काया , तो भी नि छोडू साथ , है जी हो , क्या दिन क्या रात।
सुन रे दगड़या बात सुनी जा ... बात सुनी जा मेरी ... सुन रे दगड़या बात सुनी जा ... बात सुनी जा मेरी ... जिकुड़ी मा नौउ तेरु लिख्यु च .. आंख्यु मा छाप तेरी ..
सच माना न मान गेल्या .. त्वेमा च जिया मेरी सच माना न मान गेल्या .. त्वेमा च जिया मेरी माछी मै पानी जनि तू .. फूल छो मै ...तू मेरु भोरु ... माछी मै पानी जनि तू .. फूल छो मै ...तू मेरु भोरु ...
स्वीणा मा देखि छेयी जनि ..सेंदिस पायी मेन वनि .. नापी तोली की सांचा मा ढली ..मन का ख्याल मा छाई जनि .. राजुली सी बांद छेयी तू ... सरुली कुमेण मेरी ... सुन रे दगड़या बात सुनी जा ... बात सुनी जा मेरी ...
घास का बाना बण मा जांदु .. तेरी सुद मा रुति ऐ जान्दु .. जादू ये तेरु कनु कर्यु च .. घर मा ब्व़े की गाली खांदू .. घास का बाना बण मा जांदु .. तेरी सुद मा रुति ऐ जान्दु .. जादू ये तेरु कनु कर्यु च .. घर मा ब्व़े की गाली खांदू .. मार ग्यायी मति मेरी .. चित नि रेई बस मा मेरु ... माछी मै पानी जनि तू .. फूल छो मै ...तू मेरु भोरु ..
तेरु बकी बात रूप कमयु च ...
ओ तेरु बकी बात रूप कमयु च ...
ओ त्वे मा सेरु गढ़वाल समयु च .
ओ त्वे मा सेरु गढ़वाल समयु च
तेरु बकी बात रूप कमयु च ...
पौड़ी की रौनक तेरी गलोड़यु मा ..
जोंसार जादू तेरी लटल्यु मा ...
पौड़ी की रौनक तेरी गलोड़यु मा ..
जोंसार जादू तेरी लटल्यु मा ...
श्रीनगर की गंगा तेरी आंख्यु मा ।
फूलो की घाटी तेरी उट्ठरयु मा ।
ओ दन्तर्यु मा ..दन्तर्यु में हिमालय बसयु च ..
तेरु बकी बात रूप कमयु च ...
ओ तेरु बकी बात रूप कमयु च ...
गौचर गोपेश्वर भी कन्द्र्यु मा ..
उत्तरकाशी तेरी उन्गाल्यु मा ...
डिब्रागढ़ की भूमि तेरी काली मा ..
देहरादून बस्यु तेरी खुच्ल्यु मा ...
तीलित मा ..तिलित मा टिरी समयों च ..
कमर मा टिरी की लसक ..
छुयु मा सालाणी मजाक ..
कमर मा टिरी की लसक ..
छुयु मा सालणी मजाक ..
सतपुली सी तेरी माबक ..
चाल मा भाबर सी ठसाक ..
चंबा जनू ओ चंबा जनु सुरंग क्या पयु च
प्रेम की पीड़ा को शब्दों के मोती से बया करके फिर उसे अपनी आवाज़ की मधुरता से पूर्ण करने की कला यदि किसी को आती हे तो वो श्री नेगीजी ही हे । उनके गीत
"चुलू जगोंदी बगत आई" को जितनी बार सुनो उतनी बार कम लगता है । न जाने कितने लोग अपना परिवार अपना पहाड़ छोडके शेहरो में अकेले जिन्दगी काट रहे हे ।ऐसे में ये गीत उनकी भावनाओं को कुछ ऐसे छूता हे जेसे मानो ये उनकी ही कहानी हो । यही तो ख़ास बात हे नेगीजी की उनके गीत होते ही पहाड़ के लोगो के लिए है । इसीलिए उन्हें गढ़रत्न कहते है ।
आनंद ले इस गीत के लिरिक्स का ..
रुड़ी भमांण दिन मा कभी ...
कभी लम्भी हुन्दी रातयो मा..
चोमास आंदी ..बेर कभी
मोल्यार जांदी बगत आई ..
नि घुटे फेर गफा
तुम्हारी याद खांदी बगत आई ..!!!!
चुलू जगोंदी बगत आई
कभी चुलू मुझोंदी बगत आई
होल जान्दा ..हल्यु देखि ..
कभी ..घर बाड़ा सिपायु देखि ...
होल जान्दा ..हल्यु देखि ..
कभी ..घर बाड़ा सिपायु देखि ...
कभी बाटा बिरद्या..के बटवे..
बाटू बतान्दी बगत आई ..
नि घुटेदु हेर गफा
तुम्हारी याद खांदी बगत आई ..!!!!
कभी द्यु जगोंदी बगत आई ..
कभी द्यु मूझोंदी बगत आई ..
कभी चुलू बुझोंदी बगत आई
चुलू जगोंदी बगत आई
कभी चुलू बुझोंदी बगत आई
नि घुटेदु हेर गफा
तुम्हारी याद खांदी बगत आई ..!!!!
चुलू जगोंदी बगत आई
कभी चुलू बुझोंदी बगत आई||